Monday, April 29, 2013

च्याउ म्याऊ चायना भाऊ

सुन्नेमे आराके खुर्शीदअंकल चायना जा रे. जाव जाव अछा है. अगर आप उधर जाके गांधीगिरीसे समझानेवास्ते जारेले तो जरूर ट्राय करना. वैसे उन्हे सम्झेंगी के नही पता नही. फिरभी जानेमे कोई हर्ज नही. मामला बात से हल हो सकता है तो जरुर होना  पर जायेंगे तो एअर इंडियासे तो भी जाइयेगा. फिर उन्हे भी उडने मे मजा आवेगा।

बाकी इधर पब्लिक चायनामेड आयटम्सपे बंदी कि मांग कर्री. तो सोच मै के जर दुकान मे जाके थोडा बहोत देख तो आउ के सही में चायनाबंदी करनी पड़ी तो क्या खरीद पाएंगे? वैसे ये बंदी की खबर मै मेड इन चायनावाले लैपटॉप पे ही मेड इन चायना वाले डोंगलसे इन्टरनेटसे पता करी। है के नहीं मस्त?

बाकी काफी सारी प्लास्टिककी चीजे कई सारे इलेक्ट्रोनिक्स, मोबाइल्स, साराका सारा कंप्यूटर उद्योग और बहुत सारी मशिनरी सब चायनासे ही आता है। तो उनपे बंदी डालेंगे तो अपना क्या होगा? ये भी सोचना पड़ेगा :)


वैसे अगर सही मी जंग हुई तो क्या होगा? इस मामलेमे अपने काँग्रेसवाले तो बच जायेंगे. वो तो कुछ करेंगे ही नही. सो चायनावाले खुश होके इन्हे अपने पित्तू बनाके बैठा लेंगे. मुझे तो लग रा सलमान उधर कोई ऐसेही डील मारने के लिये जा रा। डील मारलो बाबालोग अपनी तो लगनेवाली है ही मुंबईसे नजदीक जो ठहरे ... २ ४ मिसाइल्स इधर पुऩामें भी गिर जायेंगे तो गयी भैस पानी में।

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